Bhai Dooj 2023: जानें कब है भाई दूज 14 या 15 नवंबर को

Bhai Dooj 2023 कब है? आप यही सोच रहे होंगे कि भैया दूज को कब मनाएं 14 या 15 नवंबर को? चलो जानते हैं भाई दूज से सम्बंधित रोचक जानकारी तथा इसे मनाने का मुख्य कारण। और हाँ इसको मनाने का सही दिन कौनसा है ये भी जानेंगे। इस लेख को पूरा पढ़ें ।

भाई दूज त्यौहार क्या है?

  • भाई दूज, जिसे भाई टीका या भैया दूज के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध हिन्दू त्योहार है जो भाइयों और बहनों के बीच रिश्ते को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।
  • यह दीपावली के दूसरे दिन को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अक्टूबर के अंत या नवंबर के शुरू में होता है।
  • रक्षाबंधन और भाई दूज, दोनों ही भाई-बहनों के बीच के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक हैं।
  • इन दोनों ही त्योहारों पर बहनें अपने भाईयों के लिए अपनी चिंता और रक्षा का भाव व्यक्त करती हैं।
  • रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसे अपने जीवन का रक्षक मानती हैं, जबकि भाई दूज पर बहनें भाई के माथे पर रोली का टीका लगाकर और मौली बांधकर उसे अपना रक्षाकर्ता मानती हैं।
Bhaai Dooj 2023 kab hai
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भाई दूज का महत्त्व

  • भाइयों और बहनों के बीच मजबूत और प्रेमभरे रिश्ते का जश्न मनाता है।
  • बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और कल्याण की प्रार्थना करती हैं।
  • भाइयों को अपने प्रेम और संरक्षण के प्रतीक के रूप में उपहार दिया जाता है।
  • पवित्र और टिका वाले भाई-बहन के बंधन को प्रतिष्ठित करता है।
Bhai Dooj ka mahatva
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भाई दूज 2023 की तारीख और समय

  • भाई दूज 2023 का दिनांक 15 नवंबर, 2023  है।
  • यह त्योहार हिन्दू माह कार्तिक के चमकते हुए पक्ष के दूसरे चंद्र दिवस को मनाया जाता है।

भाई दूज क्यों मनाया जाता है?

टीवी९हिंदी न्यूज़ चैनल में छपी जानकारी के अनुसार भाई दूज मनाने के पीछे के ये दो कारण हो सकते हैं।

स्कंदपुराण की कथा

सूर्यदेव और उनकी पत्नी संज्ञा की दो संतान थीं। यमराज और यमुना। यमराज पापियों को दंड देने वाले देवता थे। यमुना बहुत दयालु थीं और उन्हें लोगों की पीड़ा देखकर दुख होता था। इसीलिए वे गोलोक में रहती थीं।

एक दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को गोलोक में भोजन के लिए आमंत्रित किया। यमराज अपनी बहन की इच्छा का सम्मान करते हुए गोलोक गए। यमराज के गोलोक जाने से पहले ही उन्होंने नरक के सभी निवासियों को मुक्त कर दिया था।

यमुना ने अपने भाई की बहुत आवभगत की। उन्होंने यमराज के माथे पर रोली का तिलक लगाया और उन्हें भोजन कराया। यमराज अपनी बहन की स्नेह से बहुत खुश हुए। उन्होंने यमुना से वरदान मांगा। यमुना ने यमराज से कहा कि वे हमेशा अपने भाइयों की रक्षा करें। यमराज ने यमुना का वरदान स्वीकार किया।

भाई दूज की दूसरी कथा

भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर की बहन सुभद्रा भगवान कृष्ण से बहुत प्रेम करती थीं। नरकासुर के वध के बाद सुभद्रा ने भगवान कृष्ण से उनसे मिलने की इच्छा व्यक्त की। भगवान कृष्ण ने सुभद्रा से मिलने के लिए समय दिया।

भगवान कृष्ण ने सुभद्रा से मिलने के लिए यमुना नदी पार की। यमुना नदी में स्नान करने के बाद भगवान कृष्ण सुभद्रा से मिले। सुभद्रा ने भगवान कृष्ण के माथे पर रोली का तिलक लगाया और उन्हें भोजन कराया। भगवान कृष्ण सुभद्रा की स्नेह से बहुत प्रसन्न हुए।

भाई दूज का त्योहार इन दोनों ही कथाओं से जुड़ा हुआ है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर रोली का तिलक लगाती हैं और उन्हें भोजन कराती हैं। इस दिन भाई बहन एक साथ यमुना नदी में स्नान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन भाई बहन के बीच प्रेम और स्नेह बढ़ता है।

पारंपरिक रीति रिवाज

  • बहनें अपने भाइयों की माथे पर तिलक लगाती हैं।
  • भाइयों के कल्याण के लिए आरती की जाती है।
  • बहनें अपने भाइयों को मिठाई और उपहार देती हैं।
  • भाइयों द्वारा बहनों को उपहार दिया जाता है।
Bhai Dooj 2023 Ke riti riwaj
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भाई दूज का उत्सव

  • परिवार विशेष भोजन और उत्सव के लिए एकत्र होता है।
  • बहनें अक्सर नए कपड़े और आभूषण के रूप में उपहार प्राप्त करती हैं।
  • परंपरागत मिठाई जैसे मिठाई, नारियल के लड्डू और सूखे मेवे आपस में बांटे जाते हैं।
  • सजावटी रंगोली और रंगीन फूल घरों को सजाते हैं।

सांस्कृतिक विविधता

  • भाई दूज को भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय रूपों में मनाया जाता है।
  • कुछ क्षेत्रों में, बहनें अपने भाइयों की माथे पर चंदन का पेस्ट और कुमकुम लगाती हैं।
  • इस त्योहार को अलग-अलग नामों से विभिन्न राज्यों में जाना जाता है।
bhai dooj 2023 Cultural Diversity
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निष्कर्ष

  • भाई दूज 2023 भाई-बहन के बंधन को मजबूत करने और भाइयों और बहनों के प्रति स्नेह और कृतज्ञता दिखाने का समय है।
  • यह प्यार, खुशी और पारिवारिक एकजुटता का दिन है, जहां सांस्कृतिक विविधता और परंपराएं इस विशेष रिश्ते के जश्न में एकजुट होती हैं।

मेरे हिन्दीशब्दार्थ के मित्रों आपको ये लेख कैसा लगा? आशा करता हुं कि आपको इस त्यौहार के बारे में कुछ नयी जानकारी मिली होगी। अगर कुछ भी प्रश्न आपके दिमाग में चल रहा है तो कृपया हमसे कमेंट बॉक्स में साझा करें।

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